टीका लगा कर माथे पर, बहन दुआएं बरसाती है,
हो उम्र कोई भी मन से तो बस प्यार ही लुटाती है।
बचपन से बुढ़ापे तक प्रीत का रंग रहता है पक्का,
भाई-बहन के प्यार पर दुनिया पलकें बिछाती है।
भुलाए से भी भूलती नहीं वो बचपन की तकरार,
आज भी वो छोटी-छोटी छेड़-छाड़ याद आती है।
भाई की ख़ुशी में रहता बहन का सारा जहां है,
भाई की लंबी उम्र के लिए सदा हाथ उठाती है।
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