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तो ये हँसी, ये ख़ुशी, ये मायूसी—सब बहाने लगे।

                
                                                         
                            हृदय जब असहनीय यातनाओं के
                                                                 
                            
बाद भी मुस्कुराने लगे,

शोर में निहित खामोशी जब अंतर्मन
को झुलसाने लगे,
हज़ारों इच्छाओं में व्याप्त ये आँखें,
जब बिन अश्रु-नीर छलकाने लगें,

ज़माने से एक भेंट के बाद,
मैंने लौटना चाहा जब ख़ुद की ओर,
तो ये हँसी, ये ख़ुशी, ये मायूसी—सब बहाने लगे।
 
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17 घंटे पहले

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