आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

नदिया का पानी

                
                                                         
                            नदिया का पानी गंगा का पानी घर घर पहुंचे
                                                                 
                            
बारीश में बरसेगा दुगुना पानी
अवसर है बरसाती जल धरती में समा जाए,
धरती जल को आगोश में ले ले
केनाल बना कर केनाल से घर घर पहुंचे चतुर्भुज जल
सड़कों रेलवे ट्रैकों के जाल के साथ कैनालों का जालं पीछे
बुलेट ट्रेन बुलेट केनाल साथ साथ चले
शिक्षा के लिए आय आय एम
स्वास्थ्य के लिए मेडिकल कॉलेज के संग
अत्यावश्यक है साथ में एक एक जलाशय
सभी निर्माण साथ साथ हो , संपन्ना हाथों-हाथ हो
तभी पुरी होंगी शिक्षा स्वास्थ्य जल की क्षेत्रीय जरूरतें
दिल्ली हरियाणा पंजाब में सुलह होगी
कर्नाटक तमिलनाडु का मनमुटाव दुर होगा
खेत खली हान घर घर से जल संकट फुर्र होगा
नदीया का पानी गंगा का पानी घर घर पहुंचे, तभी
सधेगा लक्ष्य 2047 का ,संपूर्ण विकास का आत्मविश्वास का
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर