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सौदाई

                
                                                         
                            सबने कहा रुक जाओ, ठहर जाओ, जो राह चुनी वह राह गलत है,
                                                                 
                            
मैं बावला, दुनिया के कहने पर, हर बार राह और मंज़िल बदलता गया।
पर ठहर गई धड़कन मेरी आकर वहाँ, जहाँ उस राह भी राघव थे, इस राह भी राघव हैं,
अब हर राह एक सी लगती है, जो मुझे खींचकर बस राघव के पास ले जाती है।
मैं जान गया हूँ, मैं कोई गीत हूँ, मैं किसी की पुकार हूँ, अब कोई भ्रम नहीं है,
चाहे इस राह चलूँ या उस राह चलूँ, मेरा हर एक कदम अब राघव है।
मेरा सच, मेरा झूठ, मेरा सुख, मेरा दुःख, मेरी जय और मेरी पराजय,
मेरा आदि, मेरा अंत, मेरा पूरा अनंत आकाश अब आप हो राघव।
जो कह दूँ अधरों से वह शब्द हो राघव, जो कहा न जाए वह मौन भाव हो राघव,
मैं जहाँ तक सोचूँ, वहाँ तक आप हो, मेरी सोच के उस पार भी बस आप हो राघव।
मैं तो बस एक कोरा काग़ज़ हूँ, जिस पर लिखा हुआ एकमात्र नाम हो राघव।
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3 महीने पहले

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