मैंने आकाशों में आशाओं को लहरते देखा है,
मैंने उनमें पूरी होने की आकांक्षाओं को देखा है।
पथ में उलझनें ढेरों भरी हैं,
पर उन्हें पार करने की उमड़ती उस प्यास को देखा है।
रास्ते चाहे निश्चित न हों मंज़िल के,
पर अनिश्चितता में भी मैंने कुछ सटीकताओं को देखा है।
मानो तो अपने आप को मानो, वरना कुछ भी नहीं,
मैंने ऐसों को भी देखा है...
जिन्होंने अपने सपनों में
कभी अपने आप को भी नहीं देखा है!
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