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उमा के स्वरुप नवरात्र

                
                                                         
                            हिमालय की पुत्री उमा के स्वरुप है नवरात्र
                                                                 
                            
उमा ने प्यार किया फक्कड, दिगम्बर शिव से
कठीन तपस्या तब विवाह की स्वीकृति पाई शिव से
पर्वत राज हिमालय ने पुरजोर विरोध किए विवाह से
एक बार हिमालय ने एक विशाल आयोजन किया
पर शिव-पार्वती को जानबूझ निमंत्रित नहीं किया
पर किया उमा की बहन विशेष रुप से की आमंत्रित किया
सिर्फ उमा ही शामिल हुई पिता के इस भव्य आयोजन में
अप्रसन्नता भी स्पष्ट लक्षित था हिमालय के मुखमंडल में
रुष्ठ उमा ने पिता से कहा कि शिव को क्यों नहीं आंमत्रित किया
घमण्ड से चूर हिमालय ने उमा को उपेक्षित किया
पति के अपमान ने दुखित उमा
क्रोधित हो कर यज्ञ कुण्ड के विशाल में कूद पड़ी
उसी समय शिव पहुंचे और सती को हवन कुण्ड उठाया
और विचलित शिव सती का शरीर हाथों लिए आकाश
में विचरण कर रहे थे
सती के जलते शरीर से विलग हुए थे
अंग अलग-अलग स्थानों गिरे वो माता का शक्तिपीठ
नवरात्र को देवी अलग-अलग दिन
अलग-अलग स्वरुपों की होती है पूजा
- भागवत प्रसाद नायक
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5 महीने पहले

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