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जीवन एक रेखा है

                
                                                         
                            जीवन एक वक्र रेखा है, या सरल रेखा है
                                                                 
                            
अपना जीवन जी लेने के बाद पता चलेगा
कि जीवन सरल ,वर्क, बहुकोणिक रेखा है
मनुष्य जीवन विगत सात विभिन्न योनिओं जन्म
के बाद ही मनुष्य योनी में जन्म मिलता है
ऐसे बहुमूल्य जीवन को कौन व्यर्थ करना चाहेगा
सभी जीव-जन्तुओं मे मानव श्रेष्ठ है
क्योंकि मानव मतिष्क सोच सकता है
बुरा-भला के बारे सोच सकता है
मनुष्य चाहे तो जीवन को
औलिकिक बना सकता है
मानव बुरा कर्म करता है
ईश्वर उसे सजा अवश्य देता है
आप अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं
बुद्ध अपने राजशाही त्याग कर
जीवन-मृत्यु,,बीमारी, शरीर का वृद्ध होना
आदि मानव जीवन में क्यों आता है
बुद्ध को बात समझ आ गई है कि
ईश्वर की इस प्रक्रिया में कोई रोक सकता है
अतः परोपकार करो,
अन्य मानव जीवन को सरल बनाओ
अंतः मानव जीवन सरल ,सरस भी है
और जीवन कठोर चट्टान भी है
जीवन एक रेखा है
सरल, सरस बनना आयके हाथ में है
-डाॅ भागवत प्रसाद नायक
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4 महीने पहले

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