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अस्थिरता

                
                                                         
                            हमारी पृथ्वी अस्थिर है और सूर्य के चक्कर लगा रही है
                                                                 
                            
उसी तरफ मनुष्य का मन अस्थिर है, इधर-उधर भाग रही है
ट्रंप का मस्तिष्क इन सबसे बहुत अधिक अस्थिर है
इतने शक्तिमान राष्ट्र सारे विश्व में प्रचंड दबदबा है
उस देश के सर्वशक्तिमान राष्ट्रपति के अस्थिर विचार
पूरे विश्व को बार-बार किसी नये युध्द की ओर ढकलेना
यही दर्शता है कि इनकी सनक मानव को खाई में ढकेलना
इधर रूस और युक्रेन का युध्द विगत चार वर्षो चल रहा है
अभी-अभी ईरान और अमेरिका युध्द का विराम.चल रहा है
अभी थोड़ा-बहुत शांति है ,पर फिर कब युध्द प्रारंभ हो जाए
यू एन ओ का कोई अस्तित्व नहीं है ,न उसको कोई प्रभाव
ज्स तरह पृथ्वी एक धूरी में घुम रही है, पता नहीं कब खिसक जाए
ईश्वर से प्रार्थना है कि आज के सर्वशक्तिमान को थोड़ा-बहुत बुध्दि दिया जाए
- भागवत प्रसाद नायक
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4 महीने पहले

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