एक कहानी जो शुरू तो हुई, पर अंजाम तक न जा सकी,
दो दिलों की धड़कन थी जो, ज़माने को न भा सकी।
हम दोनों ने मिलकर लिखे थे जो हसीन ख़्वाब,
वो महज़ एक कोरे कागज़ की दास्तान बनकर रह गए।
तुम आज भी शामिल हो मेरी हर दुआ के हर लफ़्ज़ में,
मगर तक़दीर के पन्नों पर हम कभी एक न हो सके।
मोहब्बत तो पूरी थी हमारी,
इसमें कोई शक नहीं,
बस उस अधूरी किताब का आखिरी पन्ना हम लिख न सके।
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