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माँ की ममता का कोई मोल नहीं

                
                                                         
                            माँ तो ममता का सागर है ,
                                                                 
                            
माँ प्रेम के बगिया की उजियारा है।।
जिसके आँचल की छाया में ही ,
हर बेटा के भाग्य का तारा है।।

माँ की ममता का कोई मोल नहीं,
ममतामयी माँ का प्रेम अनोखा है।।
खुद से कांटों पर चल लेती है,
हमारे हर कंटीले पथ रोका है।।

जब हम गिरते जीवन पथ पर,
कष्ट हरणी माँ हाथ बढ़ाती है।।
अपने आँचल की सुकून छाया में,
संतानों के हर पीड़ा दूर भगाती है।।

नौ महीने अपने कोख में रखकर,
संतानो ko जीवन का वरदान दिया।
अपने सुख - दुख को भूल के माँ ने,
हमको खुशियों का सारा जहान दिया।।

अक्सर खुद भूखी रह जाती लेकिन ,
अपने संतानों को रोटी खिलाती है।।
अपने कष्टों के आँसू पीकर भी माँ,
होठों से मधुर मुस्कान मुस्काती है।।

माँ की आँखों में हर अपने सपने
माँ की धड़कन में संतानो नाम।।
माँ के चरणों की धूल से ही,
रोशन होता हर संतानो का धाम।।

जब जब जीवन में घोर अँधेरा,
चारों तरफ ही छा जाता है।।
तब माँ का शक्ति रूपी आशीर्वाद ,
जीवन में दीप बन जगमगाता है।।

माँ ही मंदिर है, माँ ही पूजा है,
माँ ही शक्ति रूपा होती भगवान।
जिस घर में माँ का आशीष हो,
वही घर बन जाता तीर्थ स्थान।।

ममतामयी माँ रूपी देवी चरणों में,
सदा ही करते हम शत-शत प्रणाम।।
माँ के ममता से ही सदा रोशन होते ,
हर बेटे-बेटी रूपी संतान का नाम।।
-एम के सिंह
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5 महीने पहले

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