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क्यों? घमंड दिखाते हैं

                
                                                         
                            नहीं पता होते हैं लोगों को,
                                                                 
                            
न जाने कब कहां कैसे छीन
जाए अपनी सांसों की डोर।।

हंसते खिलखिलाते इस तन
का कब साथ छोड़ दे सांसे,
कब मुँह मोड़ ले किस ओर।।

बड़ी व्यथा होती है मन में ,सदैव
साथ रहने वाले जब अचानक जब
दुनिया को, अलविदा कर जाते हैं।।

सोचने समझने के भी समय नहीं
होते हैं लोगों के पास, फिर हम इस
नश्वर शरीर पर क्यों?घमंड दिखाते हैं।।

- एम के सिंह
भागलपुर (बिहार)
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 वर्ष पहले

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