आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

हे भगवन !

Hey Bhagwan !
                
                                                         
                            "चलते गए, कहते गए, भगवन के उपासक!
                                                                 
                            
आना तो उन्हीं का आना है, जो सच्चे हो आराधक!!"

हे भगवन, हे भगवन, हम आए तेरे भवन,
तेरे भवन में हम, भक्ति के गीत गाएंगे.....
पुष्प, नारियल, बेलपत्र, हम तेरे कदमों में चढ़ाएंगे!
हे भगवन, हे भगवन, हम आए तेरे भवन,
तेरे भवन में हम, भक्ति के गीत गाएंगे.....
कोई दूर से, कोई पास से,
कोई दु:ख में, कोई सुख में, तेरे पास आए हैं!
फूल हर रंग के, माला में गूथ के,
आज हम भक्तजन, आपको पहनाने आए हैं!
हे भगवन, हे भगवन, हम आए तेरे भवन,
तेरे भवन में हम, भक्ति के गीत गाएंगे.....
तेरे चरणों में हम, श्रद्धा का दीप जलाएंगे,
हम आरती उतारेंगे, जय-जय पुकारेंगे,
लड्डू और फल का, भोग हम लगाएंगे,
अगर जिंदगी रही तो हम, फिर दोबारा आएंगे!
हे भगवन, हे भगवन, हम आए तेरे भवन,
तेरे भवन में हम, भक्ति के गीत गाएंगे.....

- मनोज कुमार 'अनमोल'
  रतापुर, रायबरेली (उ0प्र0)

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
8 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर