मौज में हम बहे हैं तुम्हारे लिए
गमज़दा भी हुए हैं तुम्हारे लिए
थक गए हैं पुकार कर लब मगर
मौन में अब ढले हैं तुम्हारे लिए
-- मंजू
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X