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उम्र का दौर

                
                                                         
                            अब उम्र झांकती है, सफेद बालों से
                                                                 
                            
कुछ लिपटा हुआ है, अब भी ख्यालों से|

मुरझाया चेहरा, थकीं आंखें, मायूस दिल
लुट चुका है बहुत कुछ, जिंदगी के खजाने से|

अजीब दौर है, उम्र का ये भी
बुढ़ापा आया नहीं, जवानी के जाने से|

एक खलिश सी रह गई शायद
अजीब टीस है, जो बुझती नहीं बुझानें से|

अब वो दौर नहीं आएगा लौटकर मानुष
बीता वक्त भी कभी लौटा है, किसी के मनाने से|
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3 वर्ष पहले

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