शादी शुदा लोगों का नारा,
एक भी शख्स न हो कंवारा,
बीबी नाम की मर्ज मिले, और
सब बन जाए बेचारा।
घर के भोजन से बेहतर है,
रुखा सुखा चारा।
भाव भंगिमा मुख की ऐसी,
जैस सौ कोड़ों का मारा।
मन है विगलित, हृदय व्यथित है,
व्यर्थ सा लगता जीवन सारा।
सबकी यही कहानी है, पर
कोई ना कहता यारा।
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