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रिश्तों की नजाकत

                
                                                         
                            निभ जातें हैं वो रिश्ते, जिनमें दूरी होती है
                                                                 
                            
साथ छोड़ देना भी, मजबूरी होती है

फासले से ही कायम है रिश्ते,
रिश्तों में फासला भी जरूरी होती है

किसी की याद में आंखें नम हो जाएं
वो आसूं नहीं, श्रद्धा सबुरी होती है

नज़र चुराने लगे घर रिश्तों में कोई
फिर साथ रहना, बलजोरी होती है

चंद लम्हों के साथ में, कोई बेखूद कर दें
मोहब्बत नहीं जनाब, ये तो चोरी होती है

बेपरवाह, बेमुरव्वत से रिश्ता कायम रखना
मुहब्बत नहीं, जी हूजुरी होती है।
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2 वर्ष पहले

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