जीवन के दुर्गम रस्ते पर, निपट अकेला चला गया
गैरों ने भी दिया जख्म और अपनो से भी छला गया।
जीवन है एक मायाजाल,
रिश्तों का इसमें भंवरजाल।
अपनो की परिभाषा है जटिल,
गैरों से अपने ज्यादा कुटिल।
-मनीष पांडे
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