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                            छुट जयि हैं संगवा के साथी, हे रामा
                                                                 
                            
डुब जयि हैं मनवां के हाथी।

छुट जयि है बगवा बगीचा, हे रामा
छुट जयि है खेतवा जो सिंचा, हे रामा।

छुट जयि है दिन और राति, हे रामा
छुट जयि है बेटा और नाती, हे रामा।

मांई छोड जयि है, बाबुजी छोड़ जयि है,
छुट जयि है, आशा के बाती, हे रामा।

छुट जयि है गांव जवार हे रामा,
छुट जयि है कस्बा बाजार।

सोना के जईसन शरीर छुट जयि हैं,
छुट जयीहें मनवां के पीर, हे रामा।
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2 वर्ष पहले

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