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नये दौर के लोड

                
                                                         
                            भागम-भाग मची है,
                                                                 
                            
सरपट दौड़ रहें हैं लोग,
तन्हाई का आलम ये है
भीड में भी तन्हा हैं लोग।

गैरों की क्या फिक्र करेंगे,
अपनों से भी कट गए हैं लोग।

छल कपट से भरा हुआ मन
सभ्य-सुशील दिखाते लोग।

आसमान का ख्वाब हैं पाले
ख्वाबों के लिए मरते लोग।

जीना शायद भूल चुके हैं
जिंदादिली से दूर हैं लोग।
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3 वर्ष पहले

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