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जीवन मंत्र

                
                                                         
                            गिला नहीं रहा किसी से
                                                                 
                            
शिकवा भी कभी नहीं किया

जब जब ग़म की घटा है छाई
किस्मत ने जब किया ढिठाई

किस्मत की बाजी भी पलटी
आत्मबल से हरा दिया

मिथ्या है ये जीवन फिर भी
सत्य मान कर जिया किया

किया वरण मैंने मृत्यु का
हंसते हंसते विदा लिया
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3 वर्ष पहले

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