आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

जीवन संगिनी

                
                                                         
                            कोयल सी आवाज हो जिसकी
                                                                 
                            
मन निर्मल नदियां जैसी,
संगिनी हो तो ऐसी।

जिसकी आभा से रौशन हो
घर का कोना कोना,
चंद्र मुकुट सा मस्तक हो
दिल हो खारा सोना,
लज्जाशील हो, मृदु भाषिणी
मंदिर के घंटी जैसी,
संगिनी हो तो ऐसी।

पाकशास्त्र में निपुण हो
धर्मपरायण नारी हो,
करुणामयि हृदय से हो
शिष्ट आचार धारी हो,

विलंब करो ना, वरण करो
मिले जो नारी ऐसी,
कवि ह्रदय सदा पुकारे
संगिनी हो तो ऐसी।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर