राष्ट्र धर्म निभाएं फौजी,
सालों घर ना जाएं फौजी,
फौजी का पक्का ईमान
राष्ट्र का रखें हर हाल में मान।
निज सुख का करते परित्याग
अतुलनीय है इनका त्याग।
सदा निभाएं राष्ट्र धर्म,
अनुसरणीय है इनका कर्म।
रणकौशल से भरे हुए हैं
दुश्मन इनसे डरे हुए हैं।
राष्ट्र का गौरव, देश की शान
फौजी रखते, सीमा का ध्यान।
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