सुबह गर सुहानी है,
रात्रि भी तो रानी है।
जीवन नदियां हैं,
नदियां में रवानी है।
मस्त पवन के झोंके में,
खुशबू वहीं धानी है।
चैत के महीने का,
नहीं कोई सानी है।
नवान्न से सजे खलिहान,
प्रकृति कितनी दानी है।
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