सूखे पत्तों में नमी रहेगी,
बाबूजी की कमी रहेगी।
स्मृतियां करती रहती शोर,
चाहे सांझ हो, चाहे भोर,
मानस पटल में छवि रहेगी,
बाबूजी की कमी रहेगी।
छवि आपकी थी मनभावन,
यादें भी उतनी ही पावन,
दुःख वेदना दबी रहेगी,
बाबूजी की कमी रहेगी।
मां करती है आपको याद,
मैं भी करता हूं फरियाद,
आपकी थाती धरी रहेगी,
बाबूजी की कमी रहेगी।
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