ऐसा क्या काम, जिसे करने की औकात नहीं,
मन में गर बांध ली ऐसी गांठ, तो कोई बात नहीं।
माना हर काम बड़ा मुश्किल है, इस दुनिया में,
मिले आराम से जो शोहरत, कोई सौगात नहीं।
हार कर बैठ गए जो लोग तो समझिएगा,
उनमें हर बात है लेकिन, हौसल ए जज्बात नहीं।
जिनको दो वक्त की रोटी भी मयस्सर न हुई,
फिर भी कहते है कि, इतने बुरे हालात नहीं।
अपने हिस्से की खुशी भी, औलाद को दे देती हैं,
मां की आंखों में है आंसू, मगर सवालात नहीं।
- मनीष " मृदुल"
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