कुछ कर गुजरने की तमन्ना है
रुकना मेरी आदत नहीं
निकल चलती हूं अपने दम पर
देखती मैं कोई बाधा नहीं
उम्मीद तो खुद से ही लगाई है
दूसरों से लगाई गई उम्मीदे कमजोर कर देती है
हालांकि ऎसा नहीं, किसी ने साथ नहीं दिया
कलम और किताब में मेरे कदम-कदम पर,
साथ निभाया है।।
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