मनुष्य हो मनुष्यता रखो
छल कम भाव ज्याद रखो
दुष्ट कम देव ज्यादा बनो
धन कम मन ज्यादा रखो
अधर्म कम धर्म ज्यादा रखो
निंदा कम श्रद्धा ज्यादा रखो
आलस कम ऊर्जा ज्यादा रखो
जलन कम अमल ज्यादा रखो
लालच कम संतोष ज्यादा रखो
बुराई कम अच्छाई ज्यादा देखो
हताश कम हौसला ज्यादा रखो
हिंसा कम अहिंसा ज्यादा रखो
गैर कम अपनापन ज्यादा रखो
अंधेरा कम प्रकाश ज्यादा करो
नफरत कम मोहब्बत ज्यादा रखो
अलगाव कम लगाव ज्यादा रखो
दिल से सबका सत्कार ज्यादा करो
दिल में वहम कम रहम ज्यादा रखो
प्रेम,प्यार का पुरस्कार ज्यादा बांटो
लोगों को नीचा कम ऊपर ज्यादा उठाओ।।
-ममता तिवारी
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