मेरे ख्याल से प्रेम ही वह उत्पत्ति है।
जिस पर यह सृष्टि टिकी है।
धरती से प्रेम विलुप्त हो जाए।
धरती की कण कण लुप्त हो जाए।
-ममता तिवारी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X