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कोरे कागज पर

                
                                                         
                            कोरे कागज पर लिख देते हैं
                                                                 
                            
दास्तां अपनी
कलम को सुना देते हैं
अरमान अपनी
नहीं रखते हम गमों का
हिसाब अपने
खुद के ही हाथों में देते हैं
लगाम अपनी।।
-ममता तिवारी
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5 महीने पहले

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