कवि कल्पनाओं में खोया रहता,
उसे काफिर समझ मार दिया जाता।
डूबा रहता यादों के समंदर में,
मुर्दा समझ कर जला दिया जाता।।
-ममता तिवारी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X