नदी सरोवर झरना बनकर,
धरा पर प्यास बुझाता है।
बूंद बूंद से सागर बनता,
जल जीवन का आधार बन जाता है।
इसके बिना सूना सूना,
काम ना कोई हो पाता है।
कल के लिए बचाओ आज जल,
जल का एक-एक बूंद अनमोल धन है।।
-ममता तिवारी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X