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हर तरफ़

                
                                                         
                            हर तरफ धुआं धुआं नजर आता है
                                                                 
                            
यह मंजर बदला बदला नजर आता है
कब, कौन,कितना बदल जाए।
ये पता ही नही चलता है
यहां अपना दिल ही, खुद को गैर बनाए बैठा है
अपनों में अपनों की पहचान ही नहीं होती
यहां हर शख्स दो चेहरे लगाए बैठा है।।
-ममता तिवारी
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5 महीने पहले

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