दिल ये कहता है
कागज एक लेकर
मैं कहानी, कविता, या ग़जल लिखूं
यूं तो तुम रोज ख्यालों में आती हो कविता
मन करता है तुमको साक्षात करीब देखूं
दिल की तमन्ना लिखूं, या सपना कोई पुरानी लिखूं
मन करता है कविता, मैं तुमको अपने जुबानी लिखूं
तनहाई में लिखूं, या दिन के उजाले में लिखूं
हंसते हुए लिखूं, या गुमसुम होकर लिखूं
मन करता है कविता, मैं तुमको खुलेआम लिखूं।।
-ममता तिवारी
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