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बचने के लिए

                
                                                         
                            कलम उठती है मेरी,
                                                                 
                            
कुछ लिखने के लिए।
हम लिखने बैठते हैं,
फिजूल की बातों से,
बचने के लिए।।
-ममता तिवारी
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5 महीने पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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