आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

अपनी तो यही चाहत है

                
                                                         
                            अपनी तो यही चाहत है।
                                                                 
                            
रंग भर दें दूसरों के जीवन में,
यही तो मेरी राहत है।
हसरत है, यही मेरी,
और कोई इच्छा नहीं।
काम ना आएं दुनिया के,
फिर होने से कोई फायदा नहीं।
केवल जी ले,अपने लिए,
यह कोई कायदा नहीं।
सार्थक जीवन वही होती है।
जो दूसरों के काम आए।
अपने भी कुछ कर्तव्य है।
जो ख़ुशी खुशी हम निभाएं।
दे ना सके, कुछ दुनिया को,
दो शब्द ही अपना देकर जाएं
मानव रूपी जीवन को,
मानवता में लगाएं।
दुनिया के, कुछ तो काम आएं।
अपनी तो यही चाहत है।
रंग भर के, दूसरों के जीवन में,
खुशियां हम बेशुमार पाएं।।...…...
-ममता तिवारी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर