अपनी तो यही चाहत है।
रंग भर दें दूसरों के जीवन में,
यही तो मेरी राहत है।
हसरत है, यही मेरी,
और कोई इच्छा नहीं।
काम ना आएं दुनिया के,
फिर होने से कोई फायदा नहीं।
केवल जी ले,अपने लिए,
यह कोई कायदा नहीं।
सार्थक जीवन वही होती है।
जो दूसरों के काम आए।
अपने भी कुछ कर्तव्य है।
जो ख़ुशी खुशी हम निभाएं।
दे ना सके, कुछ दुनिया को,
दो शब्द ही अपना देकर जाएं
मानव रूपी जीवन को,
मानवता में लगाएं।
दुनिया के, कुछ तो काम आएं।
अपनी तो यही चाहत है।
रंग भर के, दूसरों के जीवन में,
खुशियां हम बेशुमार पाएं।।...…...
-ममता तिवारी
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