हमारे प्यारे अमर वीर भगत सिंह को
कौन रखेगा याद नहीं
क्या उनका बलिदान हमारे सीने में
चुभता आज नहीं
बेड़ियों में जकड़ी भारत मां के लिए
छोड़ चले अपने सारे सुख
मात्र 23 वर्ष की उम्र में फांसी के
फंदे को लिए चूम
यह वीर युवा भगत सिंह की
कहानी है बड़ी रूहानी
लिखते वक्त आंखों से
झर झर बहता पानी
वो इंकलाब का नारा था
वो गूंजता हुआ हुंकारा था
बम से भी नहीं डरे,
नहीं डरे वे फांसी से
सिर्फ अपनी मातृभूमि को
एक बार दिल से पुकारा था
अमर रहेगा नाम आपका
देश को आपके जाने का बहुत गम है
आपके बलिदानों,शहादतों से ही देश और हम हैं
भारत मां के लिए ही आपको आया जीना
हमारे देश ने खो दिया सबसे बड़ा नगीना।।
-ममता तिवारी
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