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प्रकृति और जीव

                
                                                         
                            💐जीव और प्रकृति💐
                                                                 
                            
👍
आखिर लौटना ही था,
हकीकत की जिंदगी में,
😊
कल्पनाओं के कमजोर पंख,
चिल-चिल्लाती तेज धूप,
बरखा जो रुठी ,
दूर दूर तक सूखा,
मगरमच्छ भी ताक में
सीप भी बूंद की प्यासी,
जन-जन लहू का प्यासा,
पेड़-पौधों की मूर्छा,
पक्षियों के हकलाते स्वर,
😢
एक संदेश छोड़ गया,
प्रकृति की तरफ लौटना होगा,
पेड़ लगाए,
पत्र न जलाए,
उनसे खाद बनाए,
बरसात होगी,
जलाशय बनाए,
हरी-भरी हरियाली होगी,
जीवन में खुशियाँ अपार होगी,
.
प्रकृति जल जीवन का मूल

डॉ०महेंद्र सिंह,
मानेसर व रेवाड़ी,
(हरियाणा)
9 वर्ष पहले

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