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मोहब्बत की कहानी का मैं वो किरदार बन जाऊँ

                
                                                         
                            मोहब्बत की कहानी का मैं वो किरदार बन जाऊँ,
                                                                 
                            
तुम्हें पाने की कोशिश में क्या से क्या ना कर जाऊँ।
जमाना रूठ भी जाये फर्क पड़ता ही ना कुछ है,
मगर तुम रूठ जाओ तो मैं जीते जी ही मर जाऊँ।।

तुम्हें देखा नहीं था पर मैं तुमसे प्यार कर बैठा,
बिना बोले ही तुमसे प्यार का इजहार कर बैठा।
बहुत हम दूर थे जैसे जमी और आसमां है पर,
तुम्हारे पास आकर के जमाना छोड़ कर बैठा।

हमे अब तुम मिली हो तो कभी भी छोड़ ना जाना,
मेरी पगलाई बातों से कभी मुहँ मोड़ ना जाना।
तुम्हारे साथ होकर के जो मंजिल है चुना हमने,
कभी रास्ते मे तुम हमको अकेला छोड़ ना जाना।

मुझे जीना नही तुम बिन यही हर बार कहता हूँ,
तुम्हारी हर अदा पे जान मैं निसार करता हूँ।
मेरी आँखें तुम्हारे बिन ना जगती है ना सोती है,
दीवाना हूँ तुम्हारा मैं तुम्ही से प्यार करता हूँ।

(कुमार रिशु राज)

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले

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