कई गलतियां होगी मगर प्रयास जारी रहेगा
""आज ली है जान अभिव्यक्ति की आजादी ने ,
आहत होकर बोल रहा ,
गांधी हैं केवल किताबों में हर राह पर गोडसे घूम रहा,
कर षड्यंत्र सज्जनों को लील रहा ,
मृदुल तरंगिनी भी जब क्रोधित होती है ,
विस्मृत मानस को विनाश प्रतिध्वनि देती है ,
है विनाश सुनिश्चित व्योम गंगा का अब तो संभल जाओ,
गोडसे नहीं गांधी बन कर शून्य नीलय के आगम को निस्पंद कर दिखाओ,
- RIP GAURI Lankesh
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