जीवन जी की लालसा, मृत्यु सत्य के पार।
मनमोहन सी मोहनी, जी जीवन जी भार ।।
चौरासी के फेर पर, पूरे सौ का भार।
ला-ला तन में जोड़ते, हारों-हारों हार ।।
मन ही मन की भावना, मनन राम सौ बार ।
मनन राम रटते चले, राम - राम सत्कार।।
कटें राम के नाम से, दुख पीड़ा हर बार ।
रामहि राम- राम - राम, भवसागर को पार।।
तन माटी चोला लिये, अहंकार भण्डार ।
राम नाम महिमा सुनो, रामहि राम अपार।।
-अनुपम कुमार श्रीवास्तव
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