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भारत भूमि तुम गौरव हो

                
                                                         
                            भारत भूमि, तुम गौरव हो हर दिल की धड़कन तुममें है,
                                                                 
                            
"वंदे मातरम्" की गूँज सजी, हर प्राण स्पंदन तुममें है
बंकिम ने जब शब्द रचे थे, जग में ज्योति सी फैली थी,
माँ भारती के चरणों में, तब प्रथम वंदन तुममें है।
क्रांति की हर लहर कहे — "हम मातृभूमि के सपूत",
तिलक, लाला, गाँधी, सुभाष,पटेल — हर रण-आवाहन तुममें है।
असम की चाय, मणिपुर का नृत्य, नगालैंड के रेशे-भाव,
हर साज, हर राग, हर ताल का मधुर अनुबंधन तुममें है।
काश्मीर की घाटी से लहराए प्रेम का पावन संदेश,
गंगा, यमुना, सरयू बहती — जीवन-संवेदन तुममें है।
राजस्थान के रेत में रचा साहस, गुजरात की कर्मधारा,
महाराष्ट्र की माटी बोले — शिव तेज-चिंतन तुममें है।
तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम — सब सुर एक मिल जाएँ,
संस्कृति का सागर गाता — नित्य अभिनंदन तुममें है।
कोलकाता की कलम से ही गूँजा “वंदे मातरम्” का नाम,
ओडिशा, बिहार, झारखंड , पंजाब— हर स्वप्न-सर्जन तुममें है।
अरुणाचल के सूरज से लेकर अंडमान की लहरों तक,
हर सीमा, हर शिखर, हर दीप — राष्ट्राभिव्यंजन तुममें है।
डेढ़ सदी का ये उत्सव है, श्रद्धा उमड़े हर जन में,
नव युग का निर्माण करे — वही पावन वंदन तुममें है।
ज्योति कहे, हर शब्द तुम्हारा, हर स्वर भारत की पहचान,
भारत भूमि, तुम गौरव हो, अमर समर्पण तुममें है।
-ज्योति वर्मा
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8 महीने पहले

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