अगर मैं कुछ माँगूँ, तो मैं भक्त कैसा,
अगर मुझे कुछ माँगना पड़ रहा है, तो तू मेरा भगवान कैसा।
मुझे वर नहीं, बस तेरा साथ चाहिए,
न सुख की चाह, न दुःख का संन्यास चाहिए।
जो लिखा है भाग्य में, उसे स्वीकार लूँ,
बस हर मोड़ पर मेरे सिर पर तेरा हाथ चाहिए।
न याचना में सामर्थ्य हो, न प्रार्थना में कोई स्वार्थ रहे,
तेरी इच्छा ही मेरा विधान हो, तेरी रज़ा में परमार्थ रहे।
न मोह रहे मन में, न माया का कोई भार रहे,
तेरे नाम के जाप में ही मेरा सम्पूर्ण संसार रहे।
न अभिलाषाओं की ज़ंजीरें हों, न अहंकार का अंधकार रहे,
मेरे इस जीवन-कारागार में बस तेरा ही प्रकाश रहे।
मैं चाहे किसी भी कण में हूँ, हर क्षण तेरा ध्यान रहे,
मेरी चेतना के कण-कण में तेरा ही गुणगान रहे।
मैं सम्पूर्ण तुम्हारा हूँ, ये भक्त को हर पल ध्यान रहे,
इस जीवन की डोर, भगवान, सदा तुम्हारे हाथ रहे।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X