चला तो जाऊँ दर तेरे, इज़हार-ए-मोहब्बत लेकर,
कभी मिल जाऊँ तुझसे, कोई शिकायत लेकर।
पूछते हैं यार मेरे—कब तक फिरोगे दर्द लेकर,
जनाज़ा उठेगा अब तो केवल, तेरी हसरत लेकर।
-जगदीश चन्द्र कापड़ी
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