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इजहार-ए-मोहब्बत

                
                                                         
                            चला तो जाऊँ दर तेरे, इज़हार-ए-मोहब्बत लेकर,
                                                                 
                            
कभी मिल जाऊँ तुझसे, कोई शिकायत लेकर।
पूछते हैं यार मेरे—कब तक फिरोगे दर्द लेकर,
जनाज़ा उठेगा अब तो केवल, तेरी हसरत लेकर।
-जगदीश चन्द्र कापड़ी
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4 hours ago

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