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                            वर्षों का तुमसे गहरा रिश्ता है
                                                                 
                            
कभी खुशी के द्वार खोले
तो कभी अंतर्मन से तोड़ दिया
एक बार नहीं बार बार टूटा
फिर टूटे मन से एक बार पूछा
चल पाओगी पीछे छोड़ इसे
चलो थोड़ा वक़्त तुझे भी दिया
लेकिन एक सच तू भी बता
चलते रास्ते पर छोड़ तो ना दोगी
यू मुझसे नाता मोड़ तो ना लोगी
यदि टूटे हम इस कदर
तो फिर क्या मुझे सम्भाल पाओगी
टूटे दिल से मेरे भरोसा जीत पाओगी
रहोगी साथ जब मेरा बनके
परछाई की तरह साथ रखूंगी
आज या कल में पूरा होगी
इसी आश में तेरे साथ आगे बढ़ती जाऊँगी
आज हो ना हो पर
लगी रहेगी उम्मीद
इसी आश में
जिंदगी के आखिरी मोड़ तक
बस कभी तुम टूटना मत
 
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एक वर्ष पहले

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