नन्हे मेहमान की आमद और बेचारा शौहर
नन्हे मेहमान की आमद ने घर का बदला हाल,
शौहर बना बावर्ची—क्या खूब है कमाल!
सुबह उठकर बेटी को स्कूल के लिए सजाता ,
जूते, मोज़े, टिफिन—सब कुछ याद दिलाता।
पहले जो अपनी चीज़ें भी ढूँढ न पाता था जनाब,
अब बेटी की चोटी भी बाँध देता है लाजवाब!
रसोई में घुसता है, बड़े प्यार से खाना बनाता,
कभी नमक कम, कभी मिर्च ज़्यादा—फिर भी मुस्कुराता।
बीवी कहती है, “आज ये खुशबू बिल्कुल नहीं सह सकती,”
शौहर कहता, “कोई बात नहीं, आज रसोई भी बंद रहती!”
खाना बनाकर प्लेट सजाता है बड़े अरमान से,
बीवी देखती है और कहती — “नहीं खाऊँगी आज!”
अगले ही पल बेचारा समझ जाता है हाल,
“कोई बात नहीं, फिर बनाएँगे—आप हैं मेरी जान!”
कभी खाना सामने आता, तो उल्टी शुरू हो जाती,
शौहर की सारी मेहनत वहीं शहीद हो जाती! 😂
लेकिन चेहरे पर शिकवा नहीं, दिल में कोई गिला नहीं,
कहता है—“तुम ठीक रहो, खाने की कोई जल्दी नहीं।”
रसोई की खुशबू से बीवी अब दूर ही रहती,
शौहर की रसोई में फिर अपनी ही दुनिया बसती।
कभी कुकर की सीटी, कभी चम्मच की झंकार,
लगता है जनाब ने खोल लिया है होटल शानदार!
बीवी कभी चिड़चिड़ाए, कभी थोड़ा गुस्सा करे,
कभी बिना वजह शौहर से नाराज़ रहे।
शौहर कहता —“ये गुस्सा भी प्यारा है जनाब,
आख़िर हमारे नन्हे मेहमान की अम्मी हैं आप!”
अब कपड़े भी धुलते, बर्तन भी चमकते,
घर के सारे काम शौहर के हाथों से सँवरते।
पहले कहता था, “ये काम मेरा नहीं,”
अब कहता, “मोहब्बत में कोई काम छोटा नहीं।”
क्योंकि ये सिर्फ़ काम नहीं, है एक जिम्मेदारी,
ये सिर्फ़ थकान नहीं—है एक और नन्ही खुशी की तैयारी।
आज शौहर थोड़ा बावर्ची, थोड़ा धोबी, थोड़ा आया,
लेकिन सच कहें तो उसने है अपना प्यार निभाया।
नन्हे मेहमान की आमद ने ये राज़ सिखाया,
मोहब्बत ने शौहर को हर काम है सिखाया।
कल जब नन्ही-सी जान गोद में आएगी,
आज की सारी थकान मुस्कुराकर मिट जाएगी।
और शौहर दिल में बस इतना कहेगा—
“जनाब, ये तो कुछ भी नहीं था…
असली ड्यूटी तो अब शुरू होगी!”
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