दुखों से ही मनुष्य सीखता है,
कठिन समय व में भी रास्ता दिखता है।
सपने टूट कर जब धरती पर गिरते हैं,
अक्ल के दरवाज़े तुरंत खुलते हैं।
हर हार से कोई सबक़ मिलता है,
चोट खाकर ही अनुभव खिलता है।
अंधेरे में जब बीज दब जाता है,
अंकुर बनकर जीवन जग जाता है।
जब यार-रिश्ते बिछड़ें, मन रोए,
तब अंदर की नई जोत जगे सोए।
दुख मौत नहीं, सच की राह है,
ज़िंदगी का असली यही तो साहस है।
-शिव राय पुरी
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