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जुगनू

                
                                                         
                            जुगनू दूर तलक चाँद का पीछा करता है,
                                                                 
                            
वो मझसे दूर है पर मुझे अपनी और खींचा करता है,
वो पेड़ तो कब का मुरझा गया उस बाग का,
लेकिन धीरज अब भी उसको सींचा करता है!

क्या हुआ जो अब वो लड़की पास नहीं,
धीरज रात को तकिया भीचा करता है!

एक अकेली गुमसुम सी बदनाम राह पर,
कोई मुसाफिर आयत खींचा करता है!

इश्क़ के वो दिन याद करूँ तो रो देता हूं,
पता करो क्या वो भी रोया करता है !

एक ही है जो आदत मुझमे गंदी है,
और वही बस करने का दिल करता है !
Dheeraj yadav(dheerajdy)
Unnao(u.p) 8532828186


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6 वर्ष पहले

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