मै आजकल जो यूँ बीमार रहता हूं,
शायद किसी दवा की शोहबत में हूं मैं,
वो मुझे मारकर तड़पा है सोचों कितना,
उसे पता चला है कि यहाँ ज़न्नत में हूं मैं !
चढ़ रहा है जो नशा शोहरत का मेरे सिर पे,
मुझे लगता है कि शायद किसी गफलत में हूं मैं !
उसका दिया नमक भी मुझे चीनी ही लगे,
उसको कह दो कि उसकी मोहब्बत में हूं मैं !
वो सोचता है मुझे मारकर वो महफूज होगा,
उससे कह दो कि उसी की हिफाज़त में हूं मैं !
Dheeraj yadav(dheerajdy)
Unnao(u. p) 8532828186
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।
आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X