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ग़ज़ल

                
                                                         
                            मै आजकल जो यूँ बीमार रहता हूं,
                                                                 
                            
शायद किसी दवा की शोहबत में हूं मैं,
वो मुझे मारकर तड़पा है सोचों कितना,
उसे पता चला है कि यहाँ ज़न्नत में हूं मैं !

चढ़ रहा है जो नशा शोहरत का मेरे सिर पे,
मुझे लगता है कि शायद किसी गफलत में हूं मैं !

उसका दिया नमक भी मुझे चीनी ही लगे,
उसको कह दो कि उसकी मोहब्बत में हूं मैं !

वो सोचता है मुझे मारकर वो महफूज होगा,
उससे कह दो कि उसी की हिफाज़त में हूं मैं !

Dheeraj yadav(dheerajdy)
Unnao(u. p) 8532828186


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6 वर्ष पहले

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