एक फरियाद
रो दिए हम उनसे लगकर के गले यूं ही,
आज सूखे में मुझे बरसात करनी थी !
ये भी है क्या सितम उसी को कह ना सके कुछ,
शख्श वो ही जिससे मुझे हर बात करनी थी !
सूरज से मिला नज़रें जुल्फें खोल दीं उसने,
शायद उसे दिन मे ही अब रात करनी थी !
मुझसे ना पूछा उसने मेरी इन्तहांइ जुस्तजू,
मुझको भी उस जल्लाद से एक फरियाद करनी थी !
मुझे छोड़ गया तन्हा जो, अपनी मंज़िल पे है वो अब,
उड़ानें हम दोनों को कभी एक साथ भरनी थीं !
मैंने भी इश्क़ कर लिया बस खेल खेल में,
मुझको भी अपनी जिंदगी बर्बाद करनी थी !
Dheeraj yadav(unnao)u.p.
8532828186
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