काश मुझे भी प्यार हो जाता
मैं भी यादों के संसार में जाता
जग बेगाना सा लगता,पर
दिल को कोई चेहरा भाता
कांटो में भी फूल से दिखते
आंखों में आँसू भी टिकते
और समंदर की लहरों पर
सपनों की मैं सेज सजाता
काश मुझे भी प्यार हो जाता
मैं भी यादों के संसार में जाता
रोज सुबह ओस की बूंदें
मुझको मोती सी लगती
हर परछाई में मुझको
उसकी सूरत ही दिखती
उससे बातें करने को
मन भी बहुत बार ललचाता
उसका चेहरा देखने को
सूरज भी उग कर डूब जाता
काश मुझे भी प्यार हो जाता
मैं भी यादों के संसार में जाता
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